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यूपी के कुशीनगर में सादगी से मनाया गया आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का जन्मदिन

तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु और राष्ट्राध्यक्ष दलाईलामा का 85 वां जन्मदिन भारत-तिब्बत सहयोग मंच के तत्वावधान में तिब्बती बुद्ध मंदिर कुशीनगर में एक सादे समारोह में केक काटकर मनाया गया। मुख्य अतिथि विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि दलाईलामा शांति के दूत हैं। उनका जन्म आज ही के दिन 1935 में उत्तर-पूर्व तिब्बत के ताकस्तेर में हुआ था। तिब्बत में चीनी विद्रोह के बाद से दलाई लामा 1959 से भारत के हिमांचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं। मंच के संयोजक डॉ. शुभलाल ने आगतों का स्वागत करते हुए दलाईलामा को भारत सरकार से भारत रत्न सम्मान दिए जाने की मांग की। कहा कि तिब्बत की आजादी के लिए अहिंसक संघर्ष जारी रखने के लिए उन्हें 1989 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। अध्यक्षता डॉ. सीएस सिंह ने की। प्रबंधक तेनजिंग तासी ने आभार ज्ञापित किया। संचालन जनार्दन ने किया।  सुरेश प्रसाद गुप्त, ओमप्रकाश सिंह, जनार्दन, डा. एके सिन्हा, डॉ. वीना कुमारी, डा. सीमा गुप्ता, डॉ. अंबरीष कुमार विश्वकर्मा, चंद्रिका प्रसाद शर्मा, टीके राय, बाबू चकमा, हिमांसन, कलाधर, संतोष, आनंद, संजय, भाग्यवान, बिट्टू, अनिल मल्ल, बाबू चकमा आदि उपस्थित रहे।

धम्म रूपी चक्र को घुमाते रहना चाहिए: प्रो. अंगराज

विपश्यना विशोधन विन्यास, इगतपुरी (महाराष्ट्र) के प्रो. अंगराज चौधरी ने कहा कि भगवान बुद्ध का धम्म ही चक्र है। इस धम्म रूपी चक्र को सदैव घुमाते रहना चाहिए। उनके बताए मार्ग पर चलने से ही सभी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

वह श्रीलंका बुद्ध बिहार कुशीनगर में पालि सोसायटी आफ इंडिया के तत्वावधान में ‘आधुनिक समाज में धम्म चक्र प्रवर्तन की प्रासंगिकता’ विषयक आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को बुद्ध ने शांति, करुणा व मैत्री का संदेश दिया। इसको अंगीकार करना होगा। मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सत्यपाल महाथेरो ने कहा कि जहां सुदर्शन चक्र हिंसा का प्रतीक है, वहीं धर्म चक्र अहिंसा का। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के श्रमण विद्या संकायाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद ने देश में पालि भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए लोगों के आगे आने का आह्वान किया।

बुद्ध के आर्य अष्टांगिक मार्ग से लोक कल्याण संभव

मुख्य वक्ता बीएचयू के पालि एवं बौद्ध अध्ययन के विभागाध्यक्ष प्रो. बिमलेंद्र कुमार ने कहा कि बुद्ध के आर्य अष्टांगिक मार्ग से लोक कल्याण संभव है। विशिष्ट अतिथि गोल्डन माउंटेन टेंपल, ताईवान के विहाराधिपति डॉ. भिक्षु तेजवारो थेरो ने कहा कि धम्म चक्र प्रवर्तन  के माध्यम से ही अविद्या रूपी अंधकार को मिटाकर प्रज्ञा रूपी प्रकाश फैलाया जा सकता है। महाबोधि सोसायटी आफ इंडिया के संयुक्त सचिव भिक्षु डॉ. मेधांकर थेरो ने कहा कि बुद्ध ने बताया है कि तृष्णा को नष्ट करके ही दु:ख से मुक्ति संभव है। इससे पूर्व भिक्षु ज्ञानालोक थेरो, विहाराधिपति बुद्ध विहार, रिसालदार पार्क, लखनऊ तथा भिक्षु डॉ. धर्मप्रिय थेरो पालि लेक्चरर- महाबोधि इंटर कालेज, सारनाथ ने बुद्ध की। स्वागत डॉ. ज्ञानादित्य शाक्य असिस्टेंट प्रोफेसर, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा ने किया। आभार ज्ञापन डॉ. रमेश चंद्र नेगी, केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय सारनाथ व संचालन डॉ. भिक्षु नंदरतन थेरो ने किया।

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